कनेक्टिविटी लैब के विमान और लेज़र प्रोग्राम में नए मील के पत्थर

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वैश्विक अभियांत्रिकी और अवसंरचना के उपाध्यक्ष, Jay Parikh द्वारा

जब से हमने Internet.org लॉन्च किया है, तब से हमारा मिशन ऐसे 4 बिलियन से अधिक लोगों को इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करने के तरीके ढूँढना है, जो अभी तक ऑनलाइन नहीं हैं. इनमें से अधिकांश लोग कम से कम 3G वायरलेस सिग्नल की रेंज में रहते हैं और 17 देशों के मोबाइल ऑपरेटर के साथ हमारे पिछले वर्ष के काम से एक बिलियन से अधिक लोगों को प्रासंगिक मूलभूत इंटरनेट सेवाओं की एक्सेस प्रदान की गई है. लेकिन ऐसे दूरस्थ स्थानों में रहने वाली 10 प्रतिशत दुनिया की जनसंख्या, जहाँ कोई इंटरनेट अवसंरचना और अन्य सभी स्थानों में उपयोग होने वाली अवसंरचना तकनीकें नहीं हैं – फ़ाइबर ऑप्टिक केबल, माइक्रोवेव रिपीटर और सेल टॉवर – इन क्षेत्रों में किफ़ायती परिनियोजन करने के लिए चुनौती हो सकती है.

यहीं से कनेक्टिविटी लैब का काम शुरू होता है. हमारा लक्ष्य ऐसी नई तकनीकों के विकास की गति को बढ़ाना है, जिनसे इंटरनेट अवसंरचना को परिनियोजित करने की अर्थव्यवस्था में जबरदस्त परिवर्तन आ सकता है. हम इस चुनौती के लिए विमान, उपग्रहों और भौमिक समाधानों सहित कई विभिन्न प्रस्तावों को एक्सप्लोर कर रहे हैं. हमारा उद्देश्य नेटवर्क बनाकर उन्हें स्वयं संचालित करना नहीं, बल्कि इन तकनीकों की स्थिति को उस बिंदु तक तुरंत उन्नत बनाना है, जहाँ ये ऑपरेटर और अन्य साझेदारों द्वारा परिनियोजित किए जाने के लिए व्यावहारिक समाधान बन जाते हैं.

आज हमारी कनेक्टिविटी लैब टीम ने इस काम में दो प्रमुख मील के पत्थरों की घोषणा की:

— Aquila का पूर्ण-पैमाने वाला संस्करण – इंग्लैंड में हमारी वायुमंडल टीम द्वारा डिज़ाइन किया गया ऊँची उड़ान भरने वाला, लंबी स्थिरता वाला विमान – अब पूरा हो चुका है और उड़ान परीक्षण के लिए तैयार है. Aquila के पंखों के फैलाव 737 है, लेकिन इसके अद्वितीय डिज़ाइन और कार्बन-फ़ाइबर वाले फ़्रेम के कारण इसका वज़न इस आकार के किसी आम विमान के वज़न के सौंवे हिस्से के बराबर है. परिनियोजित किए जाने पर, यह 60,000 से 90,000 फ़ुट की ऊँचाई से नीचे लोगों को कनेक्टिविटी प्रसारित करते हुए अधिकतम 90 दिनों तक किसी दूरस्थ क्षेत्र का चक्कर लगा पाएगा.

— वुडलैंड हिल्स, कैलीफ़ोर्निया में हमारी लेज़र संचार टीम ने महत्वपूर्ण खोज की है. उन्होंने 10 मील की दूरी से दस सेंट के सिक्के के आकार को टार्गेट करने के लिए ऐसी लेज़र को डिज़ाइन करके लैब में उसका परीक्षण किया है, जो लगभग 10 Gb प्रति सेकंड की दर पर डेटा वितरित कर सकती है – जो उद्योग की पिछली अत्याधुनिक तकनीक से लगभग 10x तेज़ है. अब हम इन लेज़र का वास्तविक दुनिया की स्थितियों में परीक्षण शुरू कर रहे हैं. इसके समाप्त हो जाने पर, हमारा लेज़र संचार सिस्टम का हमारे विमान को एक-दूसरे और भूतल से कनेक्ट करने के लिए उपयोग किया जा सकेगा, जिससे ऐसा वायुमंडलीय नेटवर्क बनाना संभव हो जाएगा, जिसे दुनिया के सबसे दूरस्थ क्षेत्र तक विस्तारित किया जा सकेगा.

अभी भी दिल्ली दूर है, लेकिन हम अपनी शुरुआती प्रगति से उत्सुक हैं. और जैसे कि हम ओपन कंप्यूट प्रोजेक्ट के साथ इतनी आगे बढ़ चुके हैं, अब हम अधिक व्यापक समुदाय से जुड़कर अपने द्वारा अभी तक प्राप्त की गई जानकारी को साझा करने की योजना बना रहे हैं, ताकि हम सभी इन तकनीकों के विकास में तेज़ी से आगे बढ़ सकें.

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